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Prakirna Madhuri

Apnapan Rakhna Mere Ghanshyam

By Devotional Song, Prakirna Madhuri, Prem Ras Madira 4 Comments

बोल एवं भावार्थ हिंदी में

प्रेम रस मदिरा

प्रकीर्ण-माधुरी (पद क्रमांक – १)

रचयिता एवं संगीत – जगद्गुरूत्तम श्री कृपालु जी महाराज

स्वर – सुश्री ब्रज परिकरी देवी जी

अपनापन रखना, मेरे घनश्याम। 
घड़ी-घड़ी पल-पल नाम तिहारो, रटे मेरी रसना मेरे घनश्याम। 
लली-लाल दोउ दै गरबाहीं, हमारे हिये बसना, मेरे घनश्याम। 
भाव-हिँडोरे डारि हिये में, झुलावूँ नित झुलना, मेरे घनश्याम। 
दै उपहार हार अँसुवन को, बना लूँ तुझे अपना, मेरे घनश्याम। 
कैसेहुँ करि ‘कृपालु’ प्रभु अपनो, पुरवो मम सपना, मेरे घनश्याम।। 

भावार्थ – हे मेरे श्यामसुन्दर ! अपने अकारण करूण विरद की सदा ही रक्षा करना अथवा हे मेरे श्यामसुन्दर! तुम मुझे सदा ही अपना समझना। हे श्यामसुन्दर! मेरी यही कामना है कि मेरी जिह्वा प्रत्येक क्षण तुम्हारे नामों की रटना लगाया करे। हे श्यामसुन्दर! हे वृषभानुनन्दिनी! तुम दोनों गले में हाथ डाले हुए हमारे हृदय में नित्य ही निवास करना। हृदय में विविध भावों के झूले में मैं तुम दोनों को नित्य ही झुलाया करूँ एवं आँसुओं की माला की भेंट देकर मैं तुमको सदा के लिए अपना बना लूँ। ‘श्री कृपालु जी’ कहते हैं कि हे श्यामसुन्दर! किसी भी प्रकार से मुझको अपना बनाकर मेरी इस कामना को पूर्ण करो। 

Lyrics and Meaning in English (click to expand)

Prem Ras Madira

Prakirna Madhuri – 1

Lyrics and Music – Jagadguruttam Shri Kripalu Ji Maharaj

Singer – Sushri Braj Parikari Devi Ji

apanāpana rakhanā, mere ghanashyāma
ghadī-ghadī pala-pala nāma tihāro, raṭe merī rasanā mere ghanashyāma
lalī-lāla dou dai garabāhīṁ, hamāre hiye basanā, mere ghanashyāma
bhāva-hiṁḍore ḍāri hiye meṁ, jhulāvūṁ nita jhulanā, mere ghanashyāma
dai upahāra hāra aṁsuvana ko, banā lūṁ tujhe apanā, mere ghanashyāma
kaisehuṁ kari ‘kripālu’ prabhu apano, puravo mama sapanā, mere ghanashyāma

Meaning – Oh My Shyāmasundara! Protecting Your promise of being causelessly merciful, please continue considering me as Your own forever. The only thing I desire is to constantly repeat Your names with my tongue. Oh Shyāmasundara! Oh Vṛishabhānunandinī! Please dwell in my heart eternally with Your arms around each other’s neck. I wish to always rock both of You in my heart in the swing of various innermost feelings; to present You the necklaces of tears and thus make You my very own forever. Jagadguru Shrī Kripālu Jī says, “Making me Yours forever somehow, please do fulfill this dream of mine.”